Poem On Corona in Hindi

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Poem On Corona in Hindi

Poem on Corona. This poem is written with respect to current Pandemic of Corona or Covid 19. The level of damage this virus have done is already visible. How can a Human experiment something that can cause the damage at this level. A short poem in Hindi dedicated to such human developments.

यूंही नहीं नम हुआ यह मौसम है,
मृत्यु के अंधकार में जीवन का प्रकाश ढूंढ रहे इंसान को देख आज कुदरत भी मायूस है।

कया पाया इंसान ने अपने ही प्रयोगों से है,
बढ़ रहे यह मृत्यु के आंकड़ों को देख, बेबस आज पूरा विश्व है।

ना कोई धर्म जीता है और नाही कोई ईश्वर हारा है,
यहां इंसान , इंसान के प्रयोगों से हारा है।

संसार में डंका बजता जिस इंसान का है,
आज हर डंके आवाज पर बढ़ता यहां मृत्यांक है।

सदियों तक याद रहनेवाली यह माहमारी है,
फिर से खुशहाली लौटे इस विश्व में, यही ईश्वर से हमारी प्रार्थना है।

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